अफ़ग़ान दास्तान-3 : अमेरिका ने अशरफ ग़नी को तालिबान से बातचीत करने की राय दी थी
17 अगस्त 2021, भारतीय समय अनुसार लगभग सुबह 3 बजे के वक़्त अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने देश को सम्बोधित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की कही हुई कई बातों को पढ़कर आपको आश्चर्य भी होगा। उन्होंने जो-कुछ कहा उसे हम इस स्पेशल रिपोर्ट के माध्यम से पहुंचा रहे हैं।
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के 2 दिन बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा है कि तालिबान तेज़ी से अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा कर सका क्योंकि वहां के नेता देश छोड़ कर भाग गये और अमेरिकी सैनिकों द्वारा प्रशिक्षित अफ़ग़ान सैनिक उनसे लड़ना नहीं चाहते थे।
उन्होंने कहा, "सच ये है कि वहां तेज़ी से स्थिति बदली क्योंकि अफ़ग़ान नेताओं ने हथियार डाल दिये और कई जगहों पर अफ़ग़ान सेना ने बिना संघर्ष के हार स्वीकार कर ली।"
अमेरिकी राष्ट्रपति का अफ़ग़ानिस्तान मामले पर सम्बोधन. साभार यूट्यूब
■ क्या अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने का अमेरिकी फ़ैसला ग़लत था?
इस मुद्दे पर टेलीविज़न पर लाइव प्रसारित अपने भाषण में अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए जो बाइडन ने कहा कि वो पूरी तरह अपने फ़ैसले के पक्ष में हैं। यानी उनका अब भी यही मानना है कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर कोई ग़लती नहीं की।
उन्होंने कहा, "जब अफ़ग़ान ख़ुद अपने लिए लड़ना नहीं चाहते तो अमेरिकियों को ऐसी लड़ाई में नहीं पड़ना चाहिये और इसमें अपनी जान नहीं गंवानी चाहिये"
अपने फ़ैसले के बारे में बाइडन ने कहा कि तालिबान के साथ बातचीत उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में शुरू की गई थी जिसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी कम की गई। एक वक़्त जहां अफ़ग़ानिस्तान में 15,500 अमेरिकी सैनिक तैनात थे वहीं समझौते के बाद सैनिकों की संख्या घटा कर 2,500 कर दी गई।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के तौर पर मेरे सामने दो विकल्प थे- या तो पहले से हुए समझौते का पालन किया जाता या फिर तालिबान के साथ लड़ाई शुरू की जाती। दूसरा विकल्प चुनने पर एक बार फिर युद्ध का आगाज़ हो जाता।"
अमेरिका के राष्ट्रपति के कहने का आशय यह है कि उन्होंने एशियाई देश अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के ख़तरे को टाला है।
■ अशरफ़ ग़नी से कहा था तालिबान से बातचीत करें
बाइडन ने कहा कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी को सलाह दी थी कि वो संकट का राजनीतिक हल तलाशने के लिए तालिबान से साथ बातचीत करें, लेकिन उनकी सलाह नहीं मानी गई।
उन्होंने कहा, "अशरफ़ ग़नी ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर अफ़ग़ान सैनिक तालिबान से लड़ेगे, लेकिन मुझे लगता है कि ये उनका ग़लत फ़ैसला था।"
■ पर्दे के पीछे से अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, "अमेरिका अफ़ग़ान नागरिकों की मदद करना बंद नहीं करेगा। हम कूटनीतिक रास्तों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का इस्तेमाल करेंगे और मानवीय मदद पहुंचाना चालू रखेंगे। हिंसा और अस्थिरता न हो इसके लिए प्रांतीय स्तर पर हम कूटनीतिक प्रयास करते रहेंगे।"
बाइडन ने कहा, "मैं इस बात को लेकर स्पष्ट हूं कि हमारे देश की विदेश नीति के केंद्र में मानवाधिकारों का सम्मान है। लेकिन ऐसा करने के लिये हम अनंत काल तक अपने सैनिकों को किसी दूसरी धरती पर नहीं भेज सकते।"
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल लंबे अमेरिकी मिशन का उद्देश्य "राष्ट्र निर्माण" या "एक केंद्रीय लोकतंत्र बनाना" नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य अमेरिकी ज़मीन पर आतंकी हमलों को रोकना था।
■ अमेरिका की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी
जो बाइडन ने अपने देश की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, "तालिबान को हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अगर अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया गया या फिर अमेरिकी अभियान पर असर पड़ा तो अमेरिका तुरंत इसका जवाब देगा और "ज़रूरत पड़ने पर अपनी पूरी विध्वंसक शक्ति के साथ अमेरिका अपने लोगों की रक्षा करेगा।"
उन्होंने कहा, "मैं चौथा राष्ट्रपति हूं तो अफ़ग़ानिस्तान संकट की आग झेल रहा है। मैं इस युद्ध की आग को अपने बाद के राष्ट्रपतियों तक नहीं पहुंचने दूंगा।"
■ जंग बंद होना ही बेहतर है
उन्होंने कहा, "मौजूदा हालात को देख कर दुख हो रहा है, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका ख़त्म करने के फ़ैसले पर मुझे कोई पछतावा नहीं है। ये युद्ध यहीं ख़त्म हो जाना चाहिये।"
आइंदा के लिये अमेरिका की नीति क्या रहेगी, इसके बारे में प्राप्त ख़बरों के मुताबिक़ अमेरिकी सैनिक काबुल हवाई क्षेत्र को सुरक्षित करेंगे, एयर ट्रैफिक का नियंत्रण अपने हाथों में लेंगे और ये सुनिश्चित करेंगे कि नागरिक और सैन्य उड़ानें चालू रहें। सैन्य सहायता के माध्यम से अमेरिका 'ऑपरेशन अलाइज़ रिफ्यूजी' चलाएगा जिसके तहत जिन अफ़ग़ान नागरिकों को तालिबान से ख़तरा है उन्हें देश से बाहर निकालने की व्यवस्था की जाएगी।
डियर रीडर्स! अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी पर यह है सुपरपावर अमेरिका का स्टैंड! हमारे देश जो लोग बेवजह उत्साहित हो रहे हैं, उन्हें यह स्पेशल रिपोर्ट पढ़नी चाहिये और अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान सुनना भी चाहिये।
उम्मीद है अफ़ग़ान दास्तान की तीसरी कड़ी आपको पसंद आई होगी। पहले वाली दोनों कड़ियों को पढ़ने के लिये नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।
अफ़ग़ान दास्तान-1 : चीन का हाथ, तालिबान के साथ
अफ़ग़ान दास्तान-2 : तालिबान के साथ खुलकर आया पाकिस्तान
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सलीम ख़िलजी
एडिटर इन चीफ़
आदर्श मुस्लिम व आदर्श मीडिया नेटवर्क
जोधपुर राजस्थान
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