धर्मस्थल और एल्कोहलयुक्त सैनिटाइजर
बरेली (उत्तर प्रदेश) स्थित दरगाह आला हजरत सुन्नी मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी के एक बयान पर सोशल मीडिया में हंगामा बरपा है। मुफ्ती साहब ने बयान दिया कि, इस्लाम में अल्कोहल को हराम करार दिया गया है। इसलिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल मस्जिदों में ना किया जाए। मस्जिद अल्लाह का घर है उसे नापाक ना होने दें। उनके बाद अनेक आलिमों ने भी इसी क़िस्म की बात कही, जिसे आप नीचे दी गई ख़बर के स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।
मुफ्ती साहब के इस बयान की सोशल मीडिया में कड़ी निंदा हो रही है। कई मुसलमानों ने इस बयान पर मुफ्ती साहब को ट्रोल किया है।
ग़ौरतलब है कि इसी तरह की एक ख़बर मध्य प्रदेश के भोपाल से भी आई थी, वहां माँ दुर्गा धाम मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर तिवारी ने सैनिटाइजर को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। पुजारी ने कहा था कि किसी को भी सैनिटाइजर लगाकर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा सकता है, क्योंकि सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है।
adarshmuslim.com पर हमने केंद्र सरकार द्वारा जारी ई-पोस्टर्स में दी गई गाइडलाइंस के आधार पर एक ब्लॉग पब्लिश किया है जिसका लिंक नीचे दिया गया है।
यहाँ पढ़ें धर्मस्थलों के बारे में सरकारी गाइडलाइंस
इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आप ख़ुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इन ई-पोस्टर्स में एल्कोहलयुक्त सैनिटाइजर की बाध्यता का कोई ज़िक्र ही नहीं है। इनमें बस यह कहा गया है कि हर विज़िटर, साबुन व पानी से अपने हाथ-मुंह धोये।
हम आपको यह जानकारी देना भी ज़रूरी समझते हैं कि रेल व बस जैसी सेवाओं में ब्लीचिंग पाउडरयुक्त पानी से सैनिटाइज़ेशन किया जा रहा है। इनमें यात्री एक लंबी देर तक बैठते हैं।
असल बात यह है कि धर्मस्थलों में एल्कोहलयुक्त सैनिटाइज़ेशन का यह मुद्दा, मीडिया द्वारा टीआरपी जुटाने के लिये उछाला जा रहा प्रोपेगैंडा है।
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