बैतुल मक़दिस की हालिया हिंसा की वजह क्या है?

रमज़ान के आख़री जुम्आ यानी 7 मई को इस्राईली सुरक्षा बलों ने मस्जिदे-अक़्सा में जुम्आ की नमाज़ पढ़ने के लिये इकट्ठा हुए 70,000 मुसलमानों पर गोलियां चलाई। 8 मई की रात 27वीं शबे क़द्र की इबादत के लिये जमा हुए नमाज़ियों पर इस्राईली सेना सुरक्षा बलों द्वारा एक बार फिर गोलीबारी की गई।

मस्जिदे-अक़्सा में हुई हिंसा का यह वीडियो फलस्तीन के मीडिया गाज़ा प्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर जारी किया है। उसके अलावा अल जज़ीरा, अरब न्यूज़, सऊदी गॅजेट, अल अरेबिया न्यूज़ चैनल, ख़लीज टाइम्स सहित खाड़ी के सभी अख़बारों व मीडिया वेबसाइटों ने इस घटना की कवरेज दी है।

मस्जिदे-अक़्सा में नमाज़ियों पर हुए हमले पर कई मुस्लिम देशों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।

टाइटल पर क्लिक करके पढ़ें : क्या मस्जिदे-अक़्सा में इस्राईली हमले पर मुस्लिम देश ख़ामोश हैं?


इस्राईल-फलस्तीन विवाद क्या है?

पहले विश्व युद्ध में उस्मानिया ख़िलाफ़त की हार के बाद पश्चिमी देशों ने उसे कई टुकड़ों में तोड़ दिया था और आपस में बांट लिया था। फलस्तीन राज्य को ब्रिटेन ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया जो उस्मानिया ख़िलाफ़त का एक हिस्सा था।

दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति और भारतीय उपमहाद्वीप से ब्रिटिश साम्राज्य की विदाई के एक साल बाद 14 मई 1948 को ब्रिटेन ने फलस्तीन राज्य को इस्राईल का नाम देकर एक यहूदी राष्ट्र दुनिया के नक़्शे पर थोप दिया।

इस्राईल के वजूद को अरब के मुस्लिम देशों ने कभी क़ुबूल नहीं किया। कई बार अरब-इस्राईल जंग हुई और हर बार अरबों की हार हुई क्योंकि अमेरिका सहित सभी पश्चिमी देश इस्राईल के समर्थन में थे।

1967 की अरब-इस्राईल जंग के बाद, इस्राईल ने एक बड़े भूभाग पर क़ब्ज़ा कर लिया और फलस्तीनी आबादी को गाज़ा व वेस्ट बैंक तक सीमित कर दिया। इस युद्ध के बाद इस्राईल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है। दिसम्बर 2017 में अमेरिका ने भी यरुशलम को इस्राईली राजधानी के रूप में स्वीकार कर लिया।

यूएनओ इस मामले में क्या कहता है?

अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूर्वी यरुशलम पर इस्राईली क़ब्ज़े का समर्थन नहीं करता। फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के एक आज़ाद मुल्क की राजधानी के तौर पर देखते हैं।

अक्टूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक़्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है।

इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि अल-अक़्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस्राईल से कहा है कि यरुशलम में उसकी गतिविधियाँ ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में आ सकती है। UN ने इजरायल से ‘अवैध निष्कासनों’ पर रोक लगाने को कहा है। UN ने कहा कि पूर्वी यरुशलम फलस्तीन में आता है और वहाँ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून लागू होते हैं।

गौरतलब है कि अल-अक़्सा मस्जिद परिसर जो कि पुराने यरुशलम शहर में है, उसे मुसलमानों की सबसे पवित्र जगहों में से एक माना जाता है। यहूदी इस जगह पर हैकले-सुलेमानी (टेम्पल माउंट) बनाना चाहते हैं।

हालिया हिंसा की वजह क्या है?

पिछले दो सालों में इस्राईल में चार बार चुनाव हुए हैं और हर बार किसी एक यहूदी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है। मार्च 2021 में हुए चुनाव में भी यही हुआ। बेंजामिन नेतन्याहू इस समय अल्पसंख्यक सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। इस्राईली संसद में बहुमत साबित न कर पाने पर वहां फिर चुनाव हो सकते हैं। शायद इसीलिये इस्राईली प्रधानमंत्री साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

मस्जिदे-अक़्सा के आसपास पूर्वी यरुशलम में मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है। पिछले दिनों नेतन्याहू सरकार ने राजधानी का दोबारा निर्माण कराने के नाम पर मुसलमानों को वहाँ से बेदख़ल करना शुरू कर दिया है। मुसलमान इसको लेकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

नेतन्याहू ने कहा है, "हम येरुशलम में निर्माण कार्य न करने को ले कर बढ़ रहे दबाव को सिरे से खारिज करते हैं। ये दुख की बात है कि हाल के दिनों में इसके लिए दबाव बढ़ा है।"

टेलीविज़न पर प्रसारित एक संदेश में उन्होंने कहा, "मैं अपने मित्रों से ये कहना चाहता हूं कि यरुशलम इस्राईल की राजधानी है और जिस तरह हर देश अपनी राजधानी में निर्माण कार्य करता है उसी तरह हमें भी अपनी राजधानी में निर्माण कार्य करने और यरुशलम को बनाने का अधिकार है। हम यही कर रहे हैं और आगे भी करेंगे।" 

अरब देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वो इस मामले में दखल दें ताकि उस इलाक़े से किसी को नहीं हटाया जाए। इस्राईल ने मूल विवाद से दुनिया का ध्यान बंटाने के लिये मस्जिदे-अक़्सा में हालिया हिंसा कराई है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस्राईल को वहाँ से किसी को भी हटाने से बचना चाहिए और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ "बल प्रयोग में अधिकतम संयम" बरतना चाहिये।

इस्राईल-फलस्तीन विवाद को सुलझाने की कई बार कोशिशें हुईं लेकिन हर बार इस्राईली हठधर्मिता के कारण नाकाम हो गई। इस्राईल को अमेरिका का खुला समर्थन भी उसकी हठधर्मिता को बढ़ावा देता है।

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सलीम ख़िलजी
(एडिटर इन चीफ़, आदर्श मुस्लिम अख़बार व आदर्श मीडिया नेटवर्क)
जोधपुर राजस्थान। व्हाट्सएप/टेलीग्राम : 9829346786

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Comments (14)
Mohamemd Hussain

Jazakallah kher

Sun 16, May 2021 · 02:54 pm · Reply
Ibrahim khan

Main falastine ke haq main hoon our israil ka virodh karta hoon. Aapki report main document proof bhi hone chahiye. Otherwise good reporting.

Wed 12, May 2021 · 06:20 am · Reply
JAINUDDIN KHAN

Main is hamle ki ninda karta hu. I am with falastini. Allah unsab ki hifazat kre. Aameen

Tue 11, May 2021 · 11:47 pm · Reply
Kasifa rahman

Allah will make you succeed at every step and May Allah save every Muslim from excesses.

Tue 11, May 2021 · 09:08 pm · Reply
Muhammad sagir ansari

Aap ki jankari acchi lagi. Or afsos bhi he apne muslman bhaiyoun ke like. Allah ummati muhaammadi per raham farmaye Aamin

Tue 11, May 2021 · 11:10 am · Reply
Shabnam kazi

Informative

Tue 11, May 2021 · 05:29 am · Reply
Firoz khan abbasi

बहुत अच्छी रिपोर्ट,

Tue 11, May 2021 · 05:01 am · Reply
Arif ansari

Bahot hi afsos hua hmare musalmaan bhaiyo ke liye

Tue 11, May 2021 · 04:03 am · Reply
Rizwan Ansari

Most Important knowledge about filistin(Haq)-israil (Baatil) matter.

Tue 11, May 2021 · 03:05 am · Reply
Ahmed Ali

आपका काम काबिले ऐ तारीफ है। हक की आवाज।

Tue 11, May 2021 · 01:03 am · Reply
Quazi aijaz

Allah ho akbar

Tue 11, May 2021 · 12:04 am · Reply
Riyaz ansari

Bhut hi aumda jankari mili

Mon 10, May 2021 · 10:35 pm · Reply
IKBAL ALI RANGREJ

Bahut hi Acchi Jankari di he aapne.

Mon 10, May 2021 · 10:15 pm · Reply
Mohammad Sameer khatri

Mashallah allha apko or likhne ki himat de ameen Allah apko himat or takkat de

Mon 10, May 2021 · 09:55 pm · Reply