ट्विटर का लीगल प्रोटेक्शन खत्म : सोशल मीडिया यूज़र्स पर क्या असर होगा?

15 जून 2021 की रात 11.30 बजे; गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर इंडिया और कांग्रेस नेता समेत 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। FIR में आरोप लगाया गया है कि मारपीट के एक मामले को सांप्रदायिक रंग दिया गया। कहा गया है कि पुलिस द्वारा मामला पूरी तरह से स्पष्ट किए जाने के बावजूद ट्विटर ने गलत ट्वीट को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।


गाज़ियाबाद पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद जुबैर (कॉ-फाउंडर फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज ), राना अय्यूब, सबा नकवी (पत्रकार), द वायर (ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल), सलमान निजामी, मसकूर उस्मानी, डॉ. शमा मोहम्मद (कांग्रेस नेता), ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ट्विटर INC के खिलाफ FIR दर्ज की है।

प्रोटेक्शन हटाने का मतलब क्या है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, IT नियमों का पालन नहीं करना ट्विटर को भारी पड़ गया है। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, भारत में अब ट्विटर ने कानूनी सुरक्षा का आधार गंवा दिया है। सरकार की ओर से 25 मई से लागू हुए IT नियमों को ट्विटर ने अब तक लागू नहीं किया है, जिसके बाद उसके खिलाफ यह एक्शन लिया गया है यानी ट्विटर पर भी अब IPC के तहत मामले दर्ज हो सकेंगे और पुलिस पूछताछ भी कर सकेगी। निम्नलिखित पॉइंट्स में समझें प्रोटेक्शन हटाने के क्या मायने हैं?

◆ केंद्र सरकार की तरफ से सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को धारा 79 के तहत सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। ये प्रोटेक्शन ट्विटर को भी मिली हुई थी। इसमें किसी आपराधिक गतिविधि के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने पर कंपनी की जिम्मेदारी नहीं होती थी और किसी भी केस में कंपनी को पक्ष नहीं बनाया जा सकता था।

◆ नए IT नियम के तहत सरकार ने कहा था कि सोशल मीडिया कंपनी एक महीने के अंदर मुख्य अनुपालन अधिकारी (CCO) की नियुक्ति करें, जो यूजर्स की शिकायतों को सुलझाए। नियुक्ति न होने पर सरकार ने धारा 79 के तहत प्रोटेक्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद 15 जून 2021 को ट्विटर के खिलाफ पहली FIR हुई है।

◆ सरकार के फैसले के बाद ट्विटर अब अकेला ऐसा अमेरिकी प्लेटफॉर्म है, जिससे IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला यह कानूनी संरक्षण वापस ले लिया गया है, जबकि गूगल, फेसबुक, यूट्यूब, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम जैसे अन्य प्लेटफॉर्म के पास अभी भी यह सुरक्षा हासिल है।

पूरा मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने लोनी इलाके में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का वीडियो वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक बुजुर्ग मुस्लिम को पीटा गया और उसकी दाढ़ी काट दी गई।

सोशल मीडिया में वायरल हुए इस वीडियो के बारे में कथित रूप से यह कहा गया कि उस बुज़ुर्ग अब्दुल समद के साथ साम्प्रदायिक कारणों से मारपीट की गई और कथित रूप से उसे जय श्रीराम और वंदे मातरम के नारे लगाने के लिये कहा गया।

गाज़ियाबाद पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस के मुताबिक, मामले की सच्चाई कुछ और ही है। पीड़ित बुजुर्ग ने आरोपी को कुछ ताबीज दिए थे, जिनके परिणाम न मिलने पर नाराज आरोपी ने इस घटना को अंजाम दिया। लेकिन, ट्विटर ने इस वीडियो को मैन्युप्युलेटेड मीडिया का टैग नहीं दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़ित ने अपनी FIR में जय श्री राम के नारे लगवाने और दाढ़ी काटने की बात दर्ज नहीं कराई है।

गाज़ियाबाद पुलिस की FIR में कहा गया है कि इन सभी लोगों ने ट्विटर पर सच्चाई को परखे बिना ही एक घटना को सांप्रदायिक रंग दिया। इनकी ओर से समाज में शांति भंग करने और धार्मिक समूहों को भड़काने के मकसद से वीडियो वायरल किया गया। पुलिस के मुताबिक, घटना पीड़ित और शरारती तत्वों के बीच व्यक्तिगत विवाद की वजह से हुई। इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही संप्रदाय के लोग शामिल थे, लेकिन आरोपियों ने घटना को इस तरह पेश किया कि दोनों धार्मिक समूहों के बीच तनाव पैदा हो।

पीड़ित अब्दुल समद के बेटे ने क्या कहा?

गाजियाबाद पीड़ित बुजुर्ग (नीली कमीज़) और उनके बेटे बबलू सैफी

पीड़ित अब्दुल समद के बेटे बबलू सैफी ने कहा, 'यह बात बेबुनियाद है कि मेरे पिता ताबीज देने का काम करते हैं। हम लुहार-बढ़ई का काम करते हैं और मेरा खुद का लकड़ी का काम है। ताबीज देने का इल्जाम गलत है।' बबलू सैफी ने इस मामले में गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने जिन लड़कों को पकड़ा है क्या वे लड़के उस वीडियो में हैं? सैफी से जब मारपीट करने वाले लड़कों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका परिवार उनमें से किसी को नहीं जानता है।

बुजुर्ग के बेटे बबलू सैफी ने कथित रूप से दावा किया, 'हमने थाना लोनी को शिकायत दी थी लेकिन कोतवाल ने अपनी मर्जी की तहरीर वहां बनाई। उसने यह भी कहा था कि अगर आपकी दाढ़ी कट गई है तो कट जाने दीजिए, हवा आएगी और आपको मजा आएगी। हमारे साथ जो हमारे मसीहा गए थे उमेद पहलवान उन्होंने कहा कि ये बात तुम्हारी गलत है। दाढ़ी मुसलमान की पहचान है। आज इनके साथ हादसा हुआ, कल मेरे साथ भी हो सकता है। ये भाषा गलत है, इसे वापस लेकर तहरीर लिख लीजिए। लेकिन उन्होंने अपनी मर्जी से तहरीर लिख हमारे वालिद से दस्तखत करा लिये।'

कुल मिलाकर यह मामला पेचीदा हो गया है। सच्चाई क्या है, यह तो जाँच के बाद ही सामने आ पाएगी।

किसकी बात सच है और किसकी झूठ, इसके बारे में अलग-अलग दावे हैं। पीड़ित अब्दुल समद के बेटे का बयान कितना सही है, इसकी हक़ीक़त सामने आना भी बाक़ी है।

सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले लोगों के लिये इस घटना में एक संदेश है कि जब तक किसी मामले की पूरी सच्चाई पता न हो, तब तक उसको वायरल नहीं करना चाहिये, वरना क़ानूनी कार्रवाई में उलझना पड़ सकता है।

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सलीम ख़िलजी
एडिटर इन चीफ़
आदर्श मुस्लिम अख़बार व आदर्श मीडिया नेटवर्क
जोधपुर राजस्थान। व्हाट्सएप : 9829346786

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Comments (1)
Hasam Khan

isake baare me mai aap se puchhane hee vaala tha kee aapane ye khabar bhej dee shukriya sir

Wed 16, Jun 2021 · 08:50 pm · Reply