लक्षद्वीप : सरकार का लक्ष्य क्या है?

भारत के दक्षिणी राज्य केरल के पास, अरब सागर में छोटे-छोटे कुछ आइलैंड्स (द्वीप) हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से लक्षद्वीप कहते हैं। आज की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम इसी लक्षद्वीप से जुड़े हालिया विवाद के बारे में पॉइंट टू पॉइंट बताएंगे। चीन के श्रीलंका में बढ़ते हस्तक्षेप का लक्षद्वीप के हालिया विवाद से क्या संबंध है? ज़रूरी जानकारियाँ देने वाली इस रिपोर्ट को अंत तक पढ़ियेगा।

लक्षद्वीप का केरल से दूरी बताने वाला नक्शा

केरल के औद्योगिक शहर कोचीन से लक्षद्वीप के आइलैंड्स की दूरी कितनी है, उसे आप ऊपर दिये गये नक्शे में देख सकते हैं। ये आइलैंड्स बहुत ख़ूबसूरत हैं और यहाँ प्रदूषण न के बराबर है। लक्षद्वीप की 97% आबादी मुस्लिम है।

लक्षद्वीप, एक केंद्र शासित प्रदेश है, यहाँ कोई विधानसभा नहीं है। राज्य की कमान राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त प्रशासक के हाथों में होती है। इस समय यहाँ के प्रशासक हैं, प्रफुल्ल पटेल। वे नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्रित्वकाल में गृहमंत्री रह चुके हैं। पटेल पर लक्षद्वीप के लोग "वहाँ की संस्कृति, रहने, खाने के तरीक़ों को नुक़सान पहुँचाने और डर फैलाने" की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि हाल के कई प्रस्तावित नियम "लोकतांत्रिक मर्यादा के ख़िलाफ़" हैं।

लक्षद्वीप के प्रशासक, प्रफुल्ल पटेल

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने नये नियमों की ड्रॉफ़्ट नोटिफ़िकेशन बनाकर मंज़ूरी के लिये केंद्र सरकार को भेजा है और उन पर केंद्र को अभी फैसला करना है। यहाँ के आम लोगों, पंचायत सदस्यों और सांसद का कहना है कि ये नोटिफ़िकेशन, नियमों को ताक पर रखकर और बिना चुने हुए प्रतिनिधियों की सलाह के लाए गए हैं। अब हम विवादित मुद्दों को पॉइंट-टू-पॉइंट समझने की कोशिश करते हैं।

01. एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्यूलेशन ड्राफ़्ट

प्रफुल्ल पटेल के आने के बाद 29 जनवरी 2021 को एक एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्यूलेशन ड्राफ़्ट तैयार किया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को एक साल तक बिना 'पब्लिक डिस्कोर्स' के हिरासत में रखा जा सकता है।

एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं कि लक्षद्वीप उन इलाक़ों में शामिल है, जहाँ देश में सबसे कम अपराध रिकॉर्ड किए गए हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ये क़ानून जिसे 'गुंडा एक्ट' भी कहा जा रहा है, इसलिए लाए जा रहे हैं, ताकि "कोई सड़क पर उतरकर" विरोध न कर सके।

02. बीफ़ पर बैन का ड्राफ्ट

फ़रवरी 2021 को एक और नोटिफ़िकेशन जारी किया गया, जिसमें बीफ़ पर बैन लगाने की बात कही गई है। एनिमल प्रिवेंशन रिग्यूलेशन के तहत जारी किए गए इस ड्राफ़्ट में गाय, भैंस और बैल का ज़िक्र है।

इस ड्राफ्ट के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को "प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बीफ़ बेचने, रखने, स्टोर करने, ट्रांसपोर्ट करने, बेचने के लिए प्रदर्शित करने या बीफ़ और इससे जुड़ा कोई प्रोडक्ट ख़रीदने" पर पाबंदी होगी।

70 हज़ार की कुल जनसंख्या वाले लक्षद्वीप में 97 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी मुसलमानों की है। यहाँ के लोगों का कहना है कि बीफ़ उनका मुख्य भोजन है।

03. दो बच्चों से ज़्यादा वाले नहीं लड़ सकते पंचायत चुनाव

28 मार्च 2021 को जारी पंचायत रेग्युलेशन ड्राफ़्ट में एक प्रावधान है, जिसकी आलोचना हो रही है, प्रावधान के मुतबिक़ किसी भी ऐसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं होगी, जिसके दो से अधिक बच्चे हों।

ग्राम पंचायत से जुड़े लोगों का आरोप है कि पटेल पंचायत और जनप्रतिनिधियों की ताक़तों को कम करना चाहते हैं। उनका यह भी आरोप है कि नए नियम "पंचायत से ताक़त छीनकर प्रशासक के हाथ में ताक़त" देने के लिए बनाए गए हैं। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से काँग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी Save Lakshdweep कैम्पेन को समर्थन दिया है।

काँग्रेस सांसद शशि थरूर का ई-पोस्टर

04. ज़मीन अधिग्रहण संबंधी ड्राफ्ट

28 मार्च 2021 को जारी किये गये एक ड्राफ़्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, "सरकार किसी भी जगह को प्लानिंग एरिया घोषित कर सकती है।"

स्थानीय निवासी इस प्रावधान से ज़्यादा ख़ौफ़ज़दा हैं। उनका कहना है कि "इसके ज़रिए नई बॉडी को असीमित शक्तियाँ दे दी जाएँगी, जिसके ज़रिए वो जब चाहें किसी की ज़मीन को अधिग्रहित कर सकते हैं। यहाँ पर पटेल 50 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण की बात कर रहे हैं, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नई इमारतें बनाने की बात हो रही है, हम विकास के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन हमें ये समझना होगा, ये छोटे-छोटे द्वीप हैं, यहाँ पर ऐसे निर्माण करने से लोगों को काफ़ी मुश्किले होंगी।"

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि ये प्रावधान "इलाक़े के विकास और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए हैं।" उन्होंने कहा कि सभी नियमों का पालन किया गया है।

मुद्दे की बात : लक्षद्वीप का प्रस्तावित विकास, श्रीलंका में चीन की मौजूदगी का तोड़ तो नहीं

भारत के दक्षिण में स्थित श्रीलंका चीन का क़र्ज़दार देश है। कुछ अरसे पहले उसने अपने एक बंदरगाह हब्बनटोटा को 99 साल की लीज़ पर चीन के हवाले कर दिया था। इसके बाद चीन ने एक और इलाके में दबदबा बढ़ाना शुरू कर दिया, जो कन्याकुमारी से महज 290 किलोमीटर दूरी पर है। ये ठिकाना है श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में बन रही पोर्ट सिटी। इसके लिये भी श्रीलंकाई संसद से क़ानून पास किया जा चुका है।

चीनी मीडिया द्वारा जारी इस फोटो में दिखाया गया है कि कंस्ट्रक्शन के बाद कोलंबो पोर्ट सिटी कुछ इस तरह नजर आएगी

श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पर चीन के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 मई 2021 को ये विवादित बिल सदन में पास हुआ और 24 मई 2021 को कोलंबो पोर्ट सिटी के कंस्ट्रक्शन का ठेका एक चीनी कंपनी को दे दिया गया।

श्रीलंका सरकार ने सदन में जो इकोनॉमिक कमीशन बिल संशोधनों के साथ पास किया, उसके मुताबिक कोलंबो पोर्ट सिटी का निर्माण होगा। ये 269 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाई जाएगी। कोलंबो पोर्ट सिटी के डायरेक्टर यामुन जयरत्ने ने कहा कि यह साउथ एशिया का फाइनेंशियल हब बनेगा। श्रीलंका भी दुबई और हाँगकाँग की तरह बेहतरीन और मैच्योर सर्विस दे सकेगा।

श्रीलंका संसद द्वारा पारित नये क़ानून के मुताबिक पोर्ट सिटी अब स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन होगा। इस पर स्थानीय प्रशासनिक निकाय का शासन नहीं होगा बल्कि इसकी देखरेख के लिए बनाए जाने वाले इकोनॉमिक कमीशन के ज़िम्मे होगा।

लक्षद्वीप से कोलंबो पोर्ट सिटी की दूरी

श्रीलंका में चीन की बढ़ती दख़लअंदाज़ी भारत के लिये चिंता का विषय है। शायद इसीलिये सरकार का ध्यान लक्षद्वीप की ओर आकर्षित हुआ है। लक्षद्वीप को स्मार्ट सिटी बनाने का फ़ैसला विदेशी निवेश को आकर्षित करना और चीन पर नकेल कसना हो सकता है। शायद भारत सरकार भी लक्षद्वीप को अरब सागर में व्यापारिक हब बनाना चाहती है, यह हमारा अनुमान है।

लक्षद्वीप का विकास हो लेकिन इसके लिये वहाँ के स्थानीय लोगों को विश्वास में लिया जाना चाहिये। स्थानीय लोगों को डराकर और दबाकर उस क्षेत्र का विकास करने का मंसूबा अशांति पैदा कर सकता है। उम्मीद है केंद्र सरकार इसे समझेगी और लक्षद्वीप के प्रशासक द्वारा दिये गये ड्राफ़्ट को निरस्त करेगी।

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सलीम ख़िलजी
एडिटर इन चीफ़,
आदर्श मुस्लिम अख़बार व आदर्श मीडिया नेटवर्क
जोधपुर राजस्थान। व्हाट्सएप/टेलीग्राम : 9829346786

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Comments (4)
Saleem Khilji · Editor-in-Chief

एक रक्षा विशेषज्ञ ने अपने देश की सरकार को सलाह दी कि अगर अपने देश में शान्ति रखनी है तो विरोधी देश में अशांति पैदा कर दो। यही थ्योरी राजनीतिक पार्टियां अपनाती है। लक्षद्वीप में असल एजेंडा भूमि अधिग्रहण क़ानून है। बाक़ी मुद्दे ध्यान बांटने के लिये छेड़े गये हैं। जब वहां लोकल स्तर पर विरोध ज़्यादा हो जाएगा तो बीफ़ खाने पर लगी रोक हटा ली जाएगी, जिस तरह गोवा में हटाई थी।

Sun 30, May 2021 · 08:05 pm · Reply
Abdul Mannan Gouri

मुसलमानों का प्रभुत्व खत्म करना प्रशासन की मनसा है

Sun 30, May 2021 · 08:04 pm · Reply
Mohammad ramjan

आपकी बात से शहमत नही हु विकास हब बनाने के लिए बीफ बेन या पंचायत चुनाव में सभी प्रत्याशियों को 2बच्चोवाली थ्योरी समझ में नहीं आया

Sun 30, May 2021 · 06:20 pm · Reply
Israr

आपका अनुमान बेहद गलत है...क्योंकि इसके लिए 2 बच्चों वाला कानून...बीफ और स्कूलों में मांसाहार बैन कानून कि जरूरत नहीं थी...साथ ही जमीनों का अधिग्रहण ना केवल मनपसंद लोगों को फायदा पहुंचाने का प्रयास है बल्कि उसकी असली मंसा यहां के लोगों को खोफ़ जदा करना है जिसके लिए गुंडा एक्ट भी परोसा गया है...इसलिए सेव लक्षद्वीप की मुहिम सभी जानकार और समझदार नागरिकों द्वारा चलाई जा रही है

Sun 30, May 2021 · 02:56 pm · Reply