दैनिक भास्कर पर इन्कम टैक्स रेड की वजह क्या हो सकती है?

आम तौर से यह माना जाता है कि दैनिक भास्कर ने बीजेपी की सरकारों से टकराव मोल लेने वाली पत्रकारिता कभी नहीं की। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान, पहली बार इसने बीजेपी सरकार को असहज कर देने वाली कुछ रिपोर्ट्स पब्लिश की। दैनिक भास्कर ने कोविड-19 से हुई मौतों से जुड़ी ख़बरें, गंगा नदी में तैरती लाशों की तस्वीरें प्रकाशित की थीं। लोगों को लगने लगा था कि अब भास्कर सच्ची पत्रकारिता करने लगा है।

21-22 जुलाई 2021 को इसके कार्यालयों पर इन्कम टैक्स की रेड पड़ी। दैनिक भास्कर ने इसे ईमानदार पत्रकारिता को दबाने वाला क़दम बताया और कड़ी हेडलाइन लगाकर सरकार से टकराने का संदेश देने की कोशिश की।

दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर छपी न्यूज़ का स्क्रीनशॉट

आज 29 जुलाई है। इन्कम टेक्स की छापेमारी को चलते हुए सात दिन बीत चुके हैं। देश के सभी ग़ैर-भाजपा दलों ने दैनिक भास्कर पर पड़ी इन्कम टैक्स पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और दैनिक भास्कर के प्रति सहानुभूति जताई है। इसके बावजूद दैनिक भास्कर के सरकार विरोधी तेवर काफ़ी नरम पड़ चुके हैं।

इस मामले से जुड़ी संभावनाओं पर अनुमान लगाने से पहले हम दैनिक भास्कर के उभार के बारे में कुछ बातें जान लेते हैं।

दैनिक भास्कर अख़बार सबसे पहले भोपाल से प्रकाशित हुआ, फिर धीरे-धीरे इसने मध्यप्रदेश के कई शहरों अपने संस्करण प्रकाशित करने शुरू किये। साल 1995 आते-आते यह मध्य प्रदेश का शीर्ष समाचार पत्र बन गया।

इसके बाद इसके मालिकों ने निर्णय लिया की मध्य प्रदेश के बाहर भी इसका प्रसार करना चाहिये। इसके लिये राजस्थान की राजधानी जयपुर को उपयुक्त समझा गया। 1996 में इसने जयपुर में समाचार पत्र शुरू किया। यहाँ उसने एक ही दिन में 50,000 प्रतियाँ बेच कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। दैनिक भास्कर ने राजस्थान के सबसे बड़े अख़बार "राजस्थान पत्रिका" को कड़ी टक्कर दी।

दैनिक भास्कर पर कथित रूप से "पेड न्यूज़" का चलन शुरू करने के भी इल्ज़ाम लगे। सनसनीखेज टाइटल्स के साथ ख़बरें प्रकाशित करना दैनिक भास्कर का शग़ल रहा है। अपना सर्कुलेशन बढ़ाने की हवस में इसने कथित रूप से साम्प्रदायिक टकराव को बढ़ावा देने या एक समुदाय विशेष की नकारात्मक छवि पेश करने से भी गुरेज नहीं किया। दैनिक भास्कर पर कथित रूप से बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने वाली रिपोर्टिंग करने का इल्ज़ाम भी लगाया गया।

दैनिक भास्कर की एक इनामी योजना का पोस्टर

दैनिक भास्कर ने एक नई क़िस्म की पत्रकारिता को जन्म दिया। इसने लाखों-करोड़ों रुपये की इनामी स्कीमें चलाकर अपनी सर्कुलेशन बढ़ाई। कार, मोटरसाइकिल, बंगला, सोना-चाँदी, होम एप्लायंसेज और नक़द रक़म वाली इनामी योजनाएं चलाकर दैनिक भास्कर ने अख़बार के पाठक को "ग्राहक" में बदल दिया। दैनिक भास्कर की देखा-देखी में आकर राजस्थान पत्रिका ने भी ऐसी योजनाएं चलाईं। हैरानी की बात यह है कि उस समय इन्कम टैक्स विभाग ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि इसके लिये पैसा कहाँ से आ रहा है?

लेकिन अब ऐसा क्या हो गया कि इन्कम टैक्स विभाग की नज़रों में दैनिक भास्कर मश्कूक (संदिग्ध) हो गया?

अख़बार या मीडिया हाउस पर इन्कम टैक्स के छापे पड़ना कोई नई बात नहीं है। साल 2017 में "एनडीटीवी" और साल 2018 में "द क्विंट" के प्रमोटरों पर भी इन्कम टैक्स की रेड पड़ चुकी है लेकिन उस समय मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो छोड़िये, राष्ट्रीय मीडिया में भी ज़्यादा चर्चा नहीं हुई। इस बार कुछ अलग हुआ है। दैनिक भास्कर के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में जगह मिली है। बीबीसी ही नहीं बल्कि अमेरिकी अख़बार "वाशिंगटन पोस्ट" ने भी दैनिक भास्कर पर पड़ी आईटी रेड की ख़बर को प्रमुखता देकर प्रकाशित किया। कुछ ख़बरों के स्क्रीनशॉट्स नीचे दिये गये हैं।

वाशिंगटन पोस्ट अमेरिका

द गार्डियन यूरोप

डॉयचे वेले फ्रांस

अल जज़ीरा क़तर

दैनिक भास्कर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की कहीं यही वजह तो नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार यह जानना चाह रही हो कि दैनिक भास्कर को "सरकार विरोधी रिपोर्टिंग" के लिये विदेशों से फंडिंग तो नहीं मिल रही? यह सिर्फ़ अनुमान हैं जो ग़लत भी हो सकते हैं और सही भी, लेकिन इस एंगल को सिरे से नकारा नहीं जा सकता। बहरहाल मामला जाँच के अधीन है, इन्कम टैक्स की कार्रवाई पूरी हो जाने के बाद क्या सच्चाई सामने आएगी, उसके बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। हम यह उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार मीडिया की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करेगी और दुर्भावना के तहत कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

डिस्क्लेमर : इस लेख में सभी विचार लेखक के अपने हैं। हमारा आशय किसी की छवि ख़राब करना क़तई नहीं है। फिर भी अगर हमारे किन्हीं शब्दों से किसी पक्ष की भावनाएं आहत हुई हों, तो हम बिना शर्त माफ़ी माँगते हैं।

सलीम ख़िलजी
एडिटर इन चीफ़
आदर्श मुस्लिम व आदर्श मीडिया नेटवर्क
जोधपुर राजस्थान

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Comments (2)
Hafiz ye Rehman Ghouri

मीडिया सरकार का चौथा स्थम्ब होता है मगर मौजूदा बीजेपी की सरकार ने राष्ट्रवाद के नाम पर डर की राजनीति पैदा कर दी है और काफी चैनल है वे बिकाऊ है और उनपो वो ही दिखान होता है जो ऊपर से आदेश मिलता है।

Fri 30, Jul 2021 · 03:29 pm · Reply
Anwar Khan

आप कब आदर्श मुस्लिम को राजस्थान से बाहर विस्तार कर रहे हैं।

Thu 29, Jul 2021 · 07:11 pm · Reply