छह साल बेमिसाल!

यह ब्लॉग एडवोकेट परवेज आलम (मेरठ) ने सेंड किया है। व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गये इस ब्लॉग को अगर सत्ता-भक्ति से न्यूट्रल होकर पढ़ा जाए तो यह ब्लॉग देश की तरक़्क़ी की फ़िक्र करने वाले सभी लोगों को चिंतन-मनन के लिये मजबूर करेगा। इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें, इसकी भाषा-शैली व्यंग्यात्मक होने के कारण आपको काफी रोचक लगेगी। (चीफ़ एडिटर)


सन 2014 से पहले तक इतिहास का वह दौर था जब हम सभी देशवासी "बहुत दुखी" थे। फैक्ट्रियों मे काम चल रहा था और कामगार लगातार काम मिलने से दु:खी थे। वे समय पर मिलने वाली अपनी पगार से भी दु:खी थे। सरकारी बाबू की तन्ख्वाह समय-समय पर आने वाले वेतन आयोगों के कारण बढ़ रही थी। हर छह महीने-साल भर में 10% तक के मँहगाई भत्ते मिल रहे थे, नौकरियां खुली हुईं थीं।

अमीर, गरीब, सवर्ण, दलित, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबके लिये UPSC था, SSC था, रेलवे थी, बैंक की नौकरियां थीं। प्राईवेट सेक्टर भी उफान पर था। मल्टी नेशनल कम्पनियां आ रहीं थी, जाॅब दे रहीं थीं। हर छोटे-बड़े शहर मे ऑडी और जगुआर जैसी कारों के शोरूम खुल रहे थे।

बहुत से घरों में एक से लेकर तीन चार तक अलग अलग माॅडलों की कारें हो रही थीं। प्रॉपर्टी में बूम था। देश के बड़े-बड़े शहरों में रहने के लिये जगह नहीं मिल रही थी, फ्लैटों की मारा-मारी मची हुई थी, महँगे बिकते थे फ़िर भी बुकिंग कई सालों की थी।

मतलब हर तरफ, हर जगह अथाह दु:ख ही दु:ख पसरा हुआ था। लोग नौकरी मिलने से, समय पर तन्ख्वाह, पेन्शन और मँहगाई भत्ता मिलने से दु:खी थे। प्राईवेट सेक्टर, IT सेक्टर में मिलने वाले लाखों के पैकेज से भी लोग दु:खी थे। कारों से, प्रॉपर्टी से, शान्ति से बहुत लोग दु:खी थे। दुःख इस बात का भी था कि सभी देश के समुदायों के लोगों को अवसर मिल रहे थे।

■ अवतारी नायक का आगमन

ऐसे समय में जब सर्वत्र दुःख पसरा हुआ था, तब अच्छे दिन का एक जादुई मंत्र लेकर देश की पवित्र भूमि पर एक अवतारी नायक का अवतरण हुआ।

भये प्रकट कृपाला दीन दयाला।
जनता ने कहा :
कीजे प्रभु लीला, अति प्रियशीला।

प्रभु ने चमत्कार दिखाने आरम्भ किये। जनता चमत्कृत होकर देखती रही।

प्रभु ने लगभग 10 फ़ीसदी की रफ़्तार से चलनें वाली तीव्र अर्थव्यवस्था को शून्य पर पहुँचाया और इसके लिए रात-दिन अथक प्रयास किये। विदेशों से कालाधन लाने के बजाय जनता का बाप-दादाओं का खज़ाना खाली करवा दिया क्योंकि जनता ही चोर निकली। सारा कालाधन छिपाए बैठी थी। यह बात प्रभु से कैसे छिप सकती थी, प्रभु तो सर्वज्ञानी हैं। प्रभु ने एक ही झटके में खेल दिया मास्टरस्ट्रोक। प्रभु की उस ऐतिहासिक लीला को "मुद्राबन्दी" का नाम दिया गया।

तमाम संवैधानिक संस्थायें रेलवे, एअरपोर्ट, दूरसंचार, बैंक, AIIMS, IIT, ISRO, CBI, RAW, BSNL, MTNL, NTPC, POWER GRID, ONGC, वगैरह-वगैरह, जो नेहरू और इंदिरा नामक "क्रूर" शासकों ने बनायीं थीं उनको ध्वस्त किया गया और उन्हें संविधान, कानून और सरकार के नियंत्रण से मुक्त किया गया।

रिज़र्व बैंक नाम की एक ऐसी ही संस्था थी जो जनता के पैसों पर किसी नाग की भाँति कुन्डली मार कर बैठी रहती थी। प्रभु ने उसका तमाम पैसा, जिसे जनता अपना समझने की भूल करती थी, तमाम प्रयासों से बाहर निकाल कर उस रिज़र्व बैंक को पैसों के भार से मुक्त किया।

■ प्रभु की अन्य लोककल्याणकारी लीलाएं

प्रजा को इन सब कार्यवाहियों से बड़ा आनन्द मिला और करतल ध्वनि से जनता ने आभार व्यक्त किया और प्रभु के गुणगान में लग गई।

प्रभु ने अनेक लोकोपकारी काम किये, जैसे सरकारी नौकरियां ख़त्म करने का पूर्ण प्रयास, बिना UPSC सीधे उप-सचिव, संयुक्त सचिव पद पर नियुक्त करना, बड़े-बड़े पदों पर मनमानी नियुक्तियां करना, ईमानदारी से काम करने वाले को सेवानिवृत्त करना, मँहगाई भत्ता रोकना, वगैरह-वगैरह।

पहले सरकारी कर्मचारी वेतन आयोगों में 30% से 40% तक की वृद्धि से दु:खी रहते थे। प्रभु के कार्यकाल वाले वेतन आयोग में जब मात्र 13% की वृद्धि ही मिली तब जाकर कहीं सरकारी कर्मचारियों को संतुष्टि मिली। पहले के क्रूर शासक तो कर्मचारियों को तनख्वाह में बढोतरी और मँहगाई भत्ता की मद में पैसे दे-देकर बिगाड़ रहे थे, उन्हें देशहित की कोई परवाह ही नहीं थी।

जब प्रभु ने धरती-स्वर्ग राज्य में लागू धारा-370 और धारा 35A समाप्त की तो प्रभु की इस लीला से जनता के दिलों की GDP उफान मारने लगी। देश की जनता ने जमकर धरती-स्वर्ग राज्य में प्लाट खरीद डाले और कई लोग तो अपने-अपने घरों में बहुये भी लाये।

■ करुणा देवी का आगमन


प्रभु जब अपनी लीला में व्यस्त थे तभी पड़ौसी देश से "करुणा" नामक एक देवी प्रभु की मदद को आ गईं। "करुणा" के आगमन की सूचना मिलते ही देश के हर शहर, गाँव, गली-कूचे में ताला लगा दिया गया। लोगों को घरों में बंद होकर आराम करने का आदेश हो गया। अब सर्वत्र शान्ति थी। लोग घरों मे बंद होकर चाट-पकौड़ी, जलेबी, मिठाई का आनंद उठाने लगे। रेलगाड़ी और हवाई जहाज़ जैसे विदेशी म्लेच्छों द्वारा आविष्कृत साधन छोड़कर लोग पैदल ही सैकड़ों हज़ारों मील की यात्रा पर निकल पड़े। पूरा देश "आत्मनिर्भर" हो गया।

फैक्ट्रियां, दुकानें सब बंद कर दी गईं। कामगारों को नौकरियों से निजात दे दी गईं। सबको गुलामों और घोड़ों की तरह मुँह पर पट्टा बाँधना अनिवार्य किया गया। जो लोग 2014 के पहले के तमाम लौकिक सुखों से दु:खी थे उनमें प्रसन्नता का सागर हिलोरे मारने लगा। जनता ने ढोल-थाली बजाकर करुणा देवी का भव्य स्वागत किया।

प्रभु की लीला तो देखिए, जो गर्भवती महिला पहले डॉक्टर के कहने पर, महीनों तक घर में पड़ी हुई रोटियां तोड़ती थीं, उन महिलाओं का प्रभु ने ऐसा सशक्तिकरण कर दिया कि वे ख़ुद ही सड़क किनारे बच्चे को जन्म देकर 160 किलोमीटर तक दौड़ने लगीं। ऐसा चमत्कार पहले कोई और कर ही नहीं पाया था।



प्रभु ने अपनी लीला से छोटे-छोटे बच्चों को भी सशक्त और आत्मनिर्भर बना दिया। हज़ारों-लाखों बच्चे सड़कों पर माता-पिता के साथ पैदल यात्रा करने लगे। कुछ बच्चे तो अपने छोटे-छोटे पैरों से रिक्शा चलाकर परिवार को ढ़ोने में खुशी पा रहे हैं। आप धन्य हैं प्रभु!

प्रभु को ग़रीबों की इतनी चिंता और फ़िक्र है कि देश का सारा खज़ाना उन पर न्यौछावर कर दिया। प्रभु ने 20 लाख करोड़ स्वर्णमुद्राएं अमीरों को दे दीं ताक़ि वे अमीर जीवनभर ग़रीबों को ग़ुलाम बनाकर रख सकें। धन्यवाद प्रभु!

यदि प्रभु के सारे कृत्यों का वर्णन किया जाये तो सारे देश के भौगोलिक क्षेत्र की समस्त भूमि और सारी नदियों का जल भी लिखने के लिये कम पड़ जाये। इसलिये थोड़े लिखे को ही ज़्यादा समझना। वैसे तो आप खुद समझदार हैं। आगे की लीला के लिए प्रभु के दूरदर्शन पर प्रकट होने की प्रतीक्षा करें। जैसे ही प्रभु धन की बात करें तो उसके बाद करतल ध्वनि से स्वागत करें। जय हो प्रभु!!

डिस्क्लेमर : इस लेख में वर्णित सभी पात्र एवं घटनाएं काल्पनिक हैं। इसमें वर्णित किसी पात्र या घटना का किसी जीवित व्यक्ति से या घटना से समानता संयोग मात्र हो सकती है। इस लेख को मनोरंजन के उद्देश्य से पढ़ें।

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Comments (10)
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