अगर कोरोना वायरस को जीने का अधिकार है तो क्या इलाज कराना जीवहत्या है?
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना वायरस कोविड-19 के बारे में बड़ा ही बेतुका बयान दिया है। इसकी वजह से वे सोशल मीडिया में ट्रोल भी हो रहे हैं। रावत, आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं। नीचे दिये गये वीडियो को देखिये,
13 मई के इस वायरल वीडियो में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा, 'वो वायरस भी एक प्राणी है। हम भी एक प्राणी हैं। हम अपने आप को ज्यादा बुद्धिमान समझते हैं। हम समझते हैं कि हम ही सबसे ज्यादा बुद्धिमान हैं। लेकिन वो प्राणी भी जीना चाहता है और उसे भी जीने का अधिकार है। हम उसके पीछे लगे हुए हैं। वो अपने बचने के लिये अपना रूप बदल रहा है। वो बहुरुपिया हो गया है।'
रावत के इस बयान का मतलब यह निकलता है कि, कोरोना वायरस में अक़्ल व समझ है, इसलिये वो इंसानों द्वारा इलाज के ज़रिए ख़त्म किये जाने की कोशिशों से बचने के लिये अपना रूप बदल रहा है।
रावत के बयान ने कई लोगों को पेशोपेश में डाल दिया है। कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है, अगर कोरोना वायरस नामी प्राणी को जीने का अधिकार है तो क्या इलाज करवाना और वैक्सीन लगवाना "जीव हत्या' होगी?
इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने तंज़ कसा है कि *कोरोना एक प्राणी है तो इसका आधार कार्ड-राशन कार्ड भी होगा?
एक यूजर ने तंज़ करते हुए कमेंट किया है कि इस वायरस प्राणी को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में शरण दे दी जानी चाहिए।
ग़ौरतलब है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है। देश के 18 राज्यों में कोरोना के चलते टोटल लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लागू हैं। वहीं 14 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक लॉकडाउन लगा हुआ है।
रावत से पहले भी बीजेपी के कई नेता बेतुकी बयानबाज़ी कर चुके हैं लेकिन जनता की याददाश्त कमज़ोर है। वो बहुत जल्दी भूल जाती है। नेताओं को बयान देते या कोई ट्वीट करते समय उसके सारे पहलुओं पर विचार करना चाहिये। ऐसे बयानों से विदेशी मीडिया को मज़े लेने का मौक़ा मिल जाता है।
बिलाल ख़िलजी
(सह संपादक एवं वेब एडिटर आदर्श मुस्लिम)
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