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तुम्हारी भी जय जय, हमारी भी जय जय

14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए हमले में 40 से ज़्यादा सीआरपीएफ जवान मारे गए. इस हमले को लेकर देशभर में आक्रोश पैदा हुआ, मीडिया पर "बदला लो, बदला लो" की पुकार मच गई. सरकार के लिये "एक्शन लेना" मजबूरी बन गया और एक्शन लिया भी गया. भारतीय सेना ने 1971 के बाद पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार की. दोनों ओर से दावे-प्रतिदावे हुए. अब सवाल यह है कि ऐसी नौबत क्यों आई? कौन जीता और कौन हारा?

बालाकोट में भारतीय वायु सेना के हमले से कितने आतंकी मरे? पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई से भारत का कितना नुक्सान हुआ? 26-27 फरवरी तक भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपने-अपने दावे पेश किये थे।

बालाकोट में हमले वाले दिन 26 फरवरी को भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा था, "इस ऑपरेशन में बड़ी संख्या में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी, ट्रेनर्स, सीनियर कमाण्डर और वहाँ आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों के समूह को मार गिराया गया।"

इसके जवाब में पाकिस्तानी सैना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा था, "वहां कोई ट्रेनिंग कैम्प नहीं है। भारत ने खाली जगह पर बम गिराए और पाकिस्तानी वायुसेना की जवाबी कार्रवाई के बाद भारत के लड़ाकू विमान भाग गए।"

एक तरफ दोनों देशों की ओर से ये सरकारी दावे किये जा रहे थे, दूसरी तरफ दोनों देशों का मीडिया पूरे जंगी जुनून में था। 26 फरवरी को एबीपी न्यूज़ ने 400 आतंकवादी मारे जाने का दावा किया था। अन्य चैनलों का हाल भी कमोबेश ऐसा ही था।

अगले दिन भारत के एक मिग-21 विमान के पाकिस्तानी फौज द्वारा गिराये जाने और एक पायलट अभिनंदन को ज़िन्दा गिरफ्तार करने की खबर को लेकर पाकिस्तानी मीडिया ने गाल बजाने शुरू कर दिये। उनका कहना था कि पाकिस्तान की कार्रवाई से भारत में मातम की दरी बिछ गई है।

एकबारगी ऐसा लगने लगा था कि अब दोनों देशों के बीच जंग शुरू होने ही वाली है। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शान्ति की अपील और भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज द्वारा ओआईसी की बैठक में टेरर फण्डिंग पर रोक लगाने की गुज़ारिश के बाद तल्‌खी कुछ कम होती नज़र आई। विंग कमाण्डर अभिनंदन की रिहाई की खबर के बाद मीडिया की सुर्खियों में जंगी जुनून के तेवर थोड़े फीके पड़े।

'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी अफसर ने कहा कि वायुसेना की स्ट्राइक में जैश द्वारा संचालित मदरसा तालीमुल कुर्आन के चार मकान तबाह हुए।

इस अफसर ने यह भी कहा, "हमारे पास राडार से ली गई तस्वीरें हैं जिससे पता चलता है कि मदरसे का गेस्ट हाउस की तरह इस्तेमाल किया जाता था और यहाँ मौलाना मसूद अज़हर का भाई रहता था। दूसरे एल शेप मकान में आतंकी ट्रेनर रहते थे। तीसरे दो मंज़िला मकान में छात्रों को रखा जाता था। चौथे मकान में ट्रेनिंग पाए आतंकियों को रखा जाता था, जिसे बम द्वारा उड़ा दिया गया।"

इन सबके बीच 'बीबीसी' ने अपनी अपनी वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में कहा कि बालाकोट में हुए हमले के बाद जान-माल के नुक्सान की खबरों की पुष्टि नहीं हो पाई। इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय हवाई हमले के बाद 'बीबीसी' रिपोर्टर सहर बलोच बालाकोट पहुंची थीं और उन्होंने इस हमले में घायल हुए एक स्थानीय शख्स नूरान शाह से बात थी जिसका घर घटनास्थल के पास ही है। बीबीसी के अनुसार इस हमले में यही एक व्यक्ति घायल हुआ और उसके मकान की छत और दीवारों में बम धमाकों की वजह से दरारें आईं।

'अल जज़ीरा' ने इस हमले की रिपोर्टिंग करते हुए लिखा, "बुधवार को (यानी हमले के एक दिन बाद) हमले की जगह जाने के बाद 'अल जज़ीरा' ने पाया कि उत्तरी पाकिस्तान के जाबा शहर के बाहर जंगल और दूरदराज के क्षेत्र में चार बम गिरे थे। विस्फोट से हुए गड्ढे में टूटे हुए पेड़ और जगह-जगह पत्थर पड़े थे लेकिन, वहां पर किसी भी तरह के मलबे और जान-माल के नुक्सान का कोई सबूत नहीं था।"

'अल जज़ीरा' ने स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया, "जिस जगह पर बम गिराए गए वहां से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर, एक ढलान वाली चोटी पर एक मदरसा है जिसे जैश-ए-मोहम्मद चलाता है। कुछ दूरी पर लगे एक साइनबोर्ड से उस जगह की पुष्टि हुई। उस साइनबोर्ड में मसूद अज़हर को तालीमुल-कुर्आन मदरसे का प्रमुख और मोहम्मद युसूफ अज़हर को प्रशासक बताया गया था।"

'अल जज़ीरा' की रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाते हुए बताया कि पहाड़ पर बना मदरसा मुजाहिदीन के लिये ट्रेनिंग कैम्प था। 'अल जज़ीरा' ने एक अन्य स्थानीय शख्स के हवाले से कहा, "हर कोई जानता था कि वहां जैश का शिविर है। वहां लोगों को लड़ना सिखाया जाता था।"

'अल जज़ीरा' ने कुछ और लोगों से भी इस बारे में पूछताछ की तो वहाँ से कुछ ही दूरी पर रहने वाले मीर अफज़ल गुलज़ार ने बताया, "यहां कोई शिविर नहीं था और कोई चरमपंथी नहीं थे। यहां 1980 में मुजाहिदीन का कैम्प हुआ करता था लेकिन अब वो यहाँ से चला गया है।"

इस मामले के बारे में सर्च करने पर पता चला कि 31 जनवरी, 2004 को विकीलीक्स द्वारा लीक किये गए अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक मेमो में ज़िक्र है कि जाबा के पास जैश-ए-मोहम्मद का एक ट्रेनिंग कैम्प है, जहां हथियारों और विस्फोट की बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है।

ब्रिटेन की न्यूज़ एजेंसी 'रॉयटर्स' ने जाबा के दौरे के बाद लिखा है कि वहां हमले से सिर्फ एक ही आदमी घायल हुआ जिसकी दाईं आंख पर हमले के कारण चोट आई हुई है। 'रॉयटर्स' के अनुसार जाबा में ऊपरी ढलानों की तरफ इशारा करते हुए गांव वालों ने बताया कि यहां चार बमों के गिरने के निशान हैं और चीड़ के पेड़ बिखरे पड़े हैं।

जाबा घने पहाड़ी और नदियों के इलाके में स्थित है जहां से कघान घाटी का रास्ता खुलता है जो कि पाकिस्तानी पर्यटकों के लिये एक पसंदीदा पर्यटक स्थल है। स्थानीय लोगों का कहना था कि वहां 400-500 लोग मिट्टी के घरों में रहते हैं। रॉयटर्स ने 15 लोगों से बात की पर नूरान शाह के सिवा किसी और के घायल होने की खबर नहीं मिली।

'रायटर्स' की रिपोर्ट से भी यह बात सामने आई कि स्थानीय लोगों ने यह स्वीकार किया कि वहां जैश-ए-मोहम्मद की मौजूदगी है। लेकिन उन्होंने वहाँ ट्रेनिंग कैम्प होने की बात से इन्कार किया। नूरान शाह ने कहा, "यह तालीम-उल-कुर्आन मदरसा है । गांव के बच्चे वहां पढ़ते हैं, वहां कोई ट्रेनिंग नहीं होती।"

'बीबीसी' ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि एयर स्ट्राइक के दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को उक्त मदरसे के जैश-ए-मोहम्मद से संबंध दर्शाने वाले साइन बोर्ड को हटा दिया गया और सेना संवाददाताओं को वहां जाने से रोक रही थी लेकिन पीछे से उस ढांचे को देखा जा सकता था और उसे कोई नुक्सान नहीं हुआ था।

विभिन्न न्यूज़ एजेंसियों की रिपोर्ट्‌स पढ़ने के बाद निम्नलिखित बातों का पता चलता है,

01. जाबा के पास भारतीय वायुसेना ने एयर-स्ट्राइक की थी, इसमें कोई शक-शुब्हे की बात नहीं है।
02. इस हमले में जान-माल के नुक्सान की कोई खबर तस्दीकशुदा नहीं है।
03. जहाँ भारतीय वायुसेना ने स्ट्राइक की वहाँ एक मदरसा है जिसे जैश-ए-मुहम्मद के संरक्षण में चलाया जा रहा था।
04. उस मदरसे में ट्रेनिंग कैम्प चलाए जाने के बारे में स्थानीय लोगों ने विरोधाभासी बातें बताईं। कुछ ने कहा कि यहाँ सिर्फ मदरसा है और कुछ ने वहाँ जैश के ट्रेनिंग कैम्प होने की बात स्वीकार की। जिन लोगों ने वहाँ ट्रेनिंग कैम्प होने की बात से इन्कार किया उन्होंने भी इस बात को कुबूल किया कि 1980 के दौरान सोवियत संघ के खिलाफ मुजाहिदीन तैयार करने के लिये वहाँ ट्रेनिंग कैम्प था।

राजनीतिक नेतृत्व को फायदा

इस एयर-स्ट्राइक से दोनों देशों के नेताओं को फायदा हुआ है। अभी कुछ दिन पहले तक देश में रफाल सौदे में घोटाला और किसानों की समस्याओं के मुद्दे पर मोदी सरकार बैकफुट पर थी। न्यूज़ चैनलों पर उनकी वापसी पर शक जताया जा रहा था और न्यूज़ चैनलों पर मोदी की घेराबंदी भी होने लगी थी। इस एयर-स्ट्राइक के बाद ये सब बातें बंद हो गई हैं और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "सुर्खियों के सरताज" हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्‌यमंत्री बीएस येद्दियुरप्‌पा ने खुले शब्दों में कह भी दिया है कि इस स्ट्राइक से बीजेपी की स्थिति मज़बूत हुई है और उसे पहले के मुकाबले में ज़्यादा सीटें मिलेंगी।

जिस दिन पाकिस्तान में जैश को निशाना बनाकर हमला किया गया उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने चुरू में एक जनसभा में "देश सुरक्षित हाथों में है" यह कहकर अपने इरादे ज़ाहिर कर भी दिये कि यह मुद्दा आगामी लोकसभा चुनावों में बीजेपी का "ट्रम्प कार्ड" होगा।

दूसरी तरफ इस एयर-स्ट्राइक के बाद बाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनेता वाली छवि मज़बूत हुई है; खास तौर पर भारतीय पायलट अभिनंदन की रिहाई के बाद। अब तक उन्हें "सैना का मोहरा" ही माना जा रहा था।

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