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ऑआईसी में सुषमा स्ट्राइक

पाकिस्तान के बालाकोट में एयर-स्ट्राइक करने के बाद भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि उस समय हासिल की जब 57 मुस्लिम देशों के संगठन "ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कॉ-ऑपरेशन" में पहली बार भारत ने शिर्कत की और इस मंच से आतंकवाद के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ओआईसी की बैठक में कहा कि चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई किसी मज़हब के खिलाफ नहीं है। सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान का नाम लिये बिना कहा, "जो देश चरमपंथ को पनाह देते हैं और उनका वित्त-पोषण करते हैं, उन्हें निश्चित ही उनकी धरती से चरमपंथी शिविरों को समाप्त करने के लिये कहा जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा, "यह एक महामारी है और तेज़ी से फैलती जा रही है और इसे अलग-अलग तरीके से चलाया जा रहा है।"

ओआईसी के सम्मेलन में भारत को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाए जाने और भारत की ओर से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के शिर्कत करने की वजह से इसके संस्थापक सदस्यों में से एक, पाकिस्तान ने इसका बॉयकॉट किया। पाकिस्तान के बयानों से विचलित हुए बिना विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि चरमपंथ के खतरे को सिर्फ "सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक तरीकों" से नहीं हराया जा सकता, बल्कि इसे "हमारे मूल्यों की मज़बूती और धर्म के संदेश" से जीता जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा, "यह सभ्यता और संस्कृति का टकराव नहींहै, बल्कि विचारों और आदर्शों के बीच प्रतिस्पर्धा है।"

पचास साल पहले अगस्त 1969 में एक इसराइली व्यक्ति ने यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद में आग लगा दी थी। तब मुसलमान देशों में ज़ाहिरी तौर पर बहुत घबराहट फैली थी कि ये मस्जिद को तोड़ने की एक साज़िश है। इसी मुद्दे पर चर्चा करने के लिये मोरक्को की राजधानी रबात में 24 मुसलमान देश इकठ्ठा हुए। अल अक्सा मस्जिद पर हमले के बाद मुसलमानों के पवित्र-स्थलों को महफूज़ बनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने, नस्लीय भेदभाव और उपनिवेशवाद का विरोध करते हुए ओआईसी की स्थापना की गई थी।

ओमान, यूएई और सऊदी अरब में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज़ अहमद के अनुसार सुषमा स्वराज का इस मंच से संवाद करना भारत के नज़रिये से बहुत अहम है। भारत में लगभग 20 करोड़ मुसलमान रहते हैं। सुषमा स्वराज ने इस मंच का उपयोग यह संदेश देने में किया कि भारतीय मुसलमान हिंसा को पसंद नहीं करता और यहां के लोग मेलजोल और सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं।

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