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'मस्जिद में आपका स्वागत है'

  • Fri, 01 Feb 2019
  • National
  • Adarsh Muslim Beuro

एक छोटा-सा वाक्य ग़लतफ़हमी मिटा रहा है. इस्लाम के बारे में गैरमुस्लिमों की जिज्ञासाओं को शांत करने और उनके शक और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए दुनिया के कई देशों में "विज़िट माई मोस्क" प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम के तहत गैर-मुस्लिमों को मस्जिद के अन्दर आने की दावत दी जाती है और उन्हें बताया जाता है कि मस्जिद में क्या होता है? इस पहल का फायदा यह हुआ है की लोगों के मन में से वो "ग़लत धारणा" निकली कि मस्जिद में "कट्टरता का पाठ" पढाया जाता है। ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा में ज़्यादातर मस्जिदों ने ऐसी पहल शुरू की है।

अब ऐसी अच्छी पहल भारत में भी शुरू हो गई है। देश के कई हिस्सों में मस्जिदों ने 'मस्जिद में आपका स्वागत है' कार्यक्रम शुरू किया है। पुणे, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे शहरों में कुछ मस्जिदें इस्लाम के बारे में लोगों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए उन्हें अपने यहां आने का न्योता दे रही हैं। धीरे-धीरे यह पहल देशभर में मजबूती हासिल कर रही है।

इस अच्छी पहल के लिए मुबारकबाद दी जानी चाहिए पुणे (महाराष्ट्र) के "आज़म कैंपस" को, जिन्होंने गैर-मुस्लिम भाइयों की ग़लतफ़हमी दूर करने की कोशिश शुरू की है'मस्जिद में आपका स्वागत है। पुणे के 28 साल के एक युवा विकास गवली के मन में अक्सर यह सवाल आता था, 'होता क्या है मस्जिद के अंदर?' फिर भी वह कभी अपने मुस्लिम दोस्तों से यह सवाल नहीं पूछ पाते थे। वह कहते हैं, 'एक डर हमेशा बना रहता था कि कहीं उन्हें बुरा तो नहीं लग जाएगा।' गवली की जिज्ञासा तब शांत हो गई जब उन्होंने पहली बार पुणे के आजम कैंपस मोहल्ले में एक मस्जिद का दौरा किया। उन्होंने इस्लाम के बारे में सवाल भी पूछे और मस्जिद परिसर में बिंदास घूमे।

गवली उन 350 लोगों में शामिल थे जिन्होंने पुणे इस्लामिक इन्फर्मेशन सेंटर (PICC) की तरफ से आयोजित कार्यक्रम के तहत मस्जिद का दौरा किया। कई सालों में पहली बार आजम कैंपस के मस्जिद ने दूसरे समुदाय के पुरुषों और महिलाओं के लिए अपना दरवाजा खोला। इसके पीछे विचार यह था कि इस्लाम और इसके प्रैक्टिसेज के बारे में लोगों के संदेहों और गलत धारणाओं को दूर किया जाए।

पुणे की इस मस्जिद के अलावा मुंब्रा (मुंबई) की अल-फुरकान मस्जिद, अहमदाबाद की मस्जिद उमर बिन खत्ताब और हैदराबाद के मशहूर स्पैनिश मस्जिद समेत 3 मस्जिदों ने भी उन लोगों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, जो वहां जाना चाहते हैं।

PICC के करीमुद्दीन शेख बताते हैं कि आज सोशल मीडिया पर जिस तरह का जहरीला माहौल तैयार हो रहा है, उसे दूर करने के लिए ऐसी पहल जरूरी है। वह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी संदेश प्रचारित हो रहे हैं कि मस्जिदें हिंसा और नफरत फैलाती हैं और मदरसों में आतंकी तैयार होते हैं। ऐसी ही गलत धारणाओं को दूर करने के लिए 'विजिट माइ मॉस्क' अभियान शुरू किया गया है।

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