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क्या प्रधानमंत्री ने अम्बानी की पैरवी की थी?

  • Sat, 16 Feb 2019
  • National
  • Adarsh Muslim Beuro

एक गाँव के चौधरी ने महाजन से कुछ सामान खरीदा. महाजन ने एक बालिश्त लम्बा हिसाब का पन्ना बनाकर चौधरी को दिया. चौधरी गाँव का रसूखदार आदमी था. एक महीने के बाद महाजन ने चौधरी से पैसे माँगे तो चौधरी ने कहा, "कौनसा हिसाब? कैसे पैसे? मैंने तो तुमसे कुछ खरीदा ही नहीं." महाजन ने राजा से शिकायत की, मंत्री से मिला. मंत्री ने उसे एक राय दी. अगले दिन राजा ने दोनों को बुलवाया. महाजन से पूछा, "हिसाब का पन्ना कैसा था?" महाजन ने कहा, "एक गज़ लम्बा था, महाराज!" ये सुनकर चौधरी चिल्लाया "महाजन झूठ बोलता है. एक गज़ का नहीं, सिर्फ एक बालिश्त का पन्ना था." राजा समझ गया कि चौधरी ने महाजन सौदा खरीदा था. कुछ ऐसी बात राहुल गाँधी के इल्‌ज़ाम और अनिल अम्बानी के प्रवक्ता की सफाई से सामने आती है.

रफाल डील पर मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच सियासी तकरार के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 12 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक ई-मेल का ज़िक्र करते हुए कहा, "रफाल डील होने से ठीक पहले अनिल अंबानी फ्रांस के मंत्री से मिले थे। सवाल उठता है कि रफाल डील होने से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षामंत्री से कैसे मिले? मोदी बिचौलिये की तरह काम कर रहे थे।'

यह ईमेल 28 मार्च 2015 का है जिसे कथित तौर पर एयरबस के कार्यकारी निकोलस चामुसी द्वारा तीन लोगों को भेजा गया था और इस ईमेल की "सब्जेक्ट लाइन" में लिखा था, "अंबानी।" राहुल गाँधी ने कहा, "अनिल अंबानी को पहले से पता था कि उन्हें रफाल सौदा मिलने वाला है। प्रधानमंत्री ने जो किया वह देशद्रोह और सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन है।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "पहले ये भ्रष्टाचार का मामला था, अब ये ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का मामला हो गया है। इस पर कार्रवाई शुरु हो जानी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा, "प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा से समझौता किया है। उन्होंने रक्षा मामले की जानकारी एक ऐसे व्यक्ति को दी जिसके पास ये जानकारी नहीं होनी चाहिए।"

राहुल गांधी ने मीडिया के रिपोर्टरों को वो कथित ई-मेल दिखाकर कहा, "एक ई-मेल है जिसमें लिखा है कि रफाल डील होने से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षा मंत्री से मिले । उस बैठक में अनिल अंबानी ने कहा कि मोदी फ्रांस के दौरे पर आने वाले हैं और एक एमओयू साइन होने वाला है, यानी रफाल डील होने वाला है। सवाल उठता है कि रफाल डील के बारे में रक्षा मंत्री को नहीं मालूम, विदेश सचिव को नहीं मालूम लेकिन अनिल अंबानी को डील होने से 10 दिन पहले पता चल गया। यानी मोदी बिचौलिये का काम कर रहे थे। उन्हें बताना चाहिए कि अनिल अंबानी को कैसे रफाल डील केबारे में पता चला?'

जब मीडिया रिपोर्टर्स ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में सौदे में किसी घपले से इन्कार किया है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बात पर कायम रहते हुए रफाल सौदे पर संसद में प्रस्तुत सीएजी की रिपोर्ट को चौकीदार ऑडिटर जनरल रिपोर्ट करार दिया। उन्होंने रफाल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि सरकार ने कोर्ट में सही जानकारी नहीं दी।

राहुल गांधी ने कहा कि सभी विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच करवानी हो करवा लें, लेकिन रफाल डील की भी जांच हो। आप क्यों नहीं जांच करा रहे हैं? जेपीसी जांच करा दी जाए, एक ही बात है कि वह इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं इसलिए प्रधानमंत्री जेपीसी जांच नहीं करा रहे हैं।

ये इल्ज़ाम बड़ा संगीन है। जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में यह नज़रिया रखते हैं कि उनमें कुछ खामियाँ हो सकती हैं लेकिन वे "भ्रष्ट" नहीं हैं, उनके लिये काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का ये बयान बहुत शॉकिंग है । अच्छा तो यह होता कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री खुद आगे बढ़कर सामने आते और "संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी)" से रफाल सौदे की जाँच कराने की घोषणा कर देते, जिसकी विपक्षी दल लम्बे समय से माँग कर रहे हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

राहुल गांधी के रफाल के संबंध में लगाए गए आरोपों पर रिलायंस डिफेंस ने उसी दिन सफाई दी। रिलायंस डिफेंस ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रफाल सौदे को लेकर अपने नए आरोपों में जिस कथित ई-मेल का हवाला देते हुए "प्रस्तावित एमओयू" का ज़िक्र किया है, वह एयरबस हेलिकॉप्टर के साथ उसके सहयोग के संदर्भ में था। उसका रफाल कॉन्ट्रैक्ट कोई लेना-देना नहीं है।

रिलायंस डिफेंस के प्रवक्ता के बयान के बाद आप एक बार फिर "चौधरी और महाजन" वाली कहानी को पढें। रिलायंस डिफेंस के प्रवक्ता ने यह नहीं कहा कि "ये ईमेल फ़र्ज़ी है" बल्कि ये कहा कि "ये एयरबस और हेलिकॉप्टर सौदे के सम्बंध में था ।"

यानी काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जिस ईमेल का ज़िक्र किया है, वो फ़र्ज़ी नहीं है। राहुल गाँधी का इल्ज़ाम यह है कि उस ईमेल में अनिल अम्बानी को रफाल सौदे में ऑफसेट पार्टनर बनाने का ज़िक्र है और अम्बानी की कम्पनी कह रही है कि उसमें असैनिक एयरबस का ज़िक्र है। चलिये, हम मान लेते हैं कि रिलायंस डिफेंस की बात सही है तो सवाल यह उठता है कि किसी प्राइवेट विमान के सौदे के बारे में, प्राइवेट कम्पनी के मालिक अनिल अम्बानी के पक्ष में प्रधानमंत्री क्यों बात करने वाले थे? कुछ बात तो है, जो छुपाई जा रही है।

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